कुल मिलाकर, 2025 भारत की विदेश नीति के लिए एक कठिन वर्ष रहा, जिसमें विकल्प सीमित होते चले गए और वर्ष के अंत तक भारत की विदेश नीति एक बार फिर बाध्यताओं, अवसरों और विकल्पों से अधिक संचालित होती हुई दिखाई दी।
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